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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
सीधी जिले में जनजातियों के विकास कार्यक्रमों का कृषि पर प्रभाव का अध्ययन
Authors
डाॅ0 मृगेन्द्र सिंह परिहार
Abstract
कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। इस कारण सभी प्रकार की ग्रामीण विकास योजनाएँ कृषि विकास पर केन्द्रित हैं। जिले की कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत से अधिक भाग ग्रामों में निवास करता है, जिनका प्रमुख धंधा कृषि कार्य या कृषि मजदूरी है। इससे जिले की कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था का महत्व पूर्णतः स्पष्ट हो जाता है। जिले में होने वाली कृषि ‘जीवन निर्वाह कृषि’ के अन्तर्गत आती है। इस कारण यहाँ की फसलों में खाद्यान्न फसलों की प्रचुरता पाई जाती है। यहाँ की प्रमुख खाद्य फसलें - गेहू, चावल, जौ, ज्वार, मक्का, कोदौ, सांवा, मेझरी, कुटकी, चना, मसूर आदि है। जिले में खाद्य व अखाद्य फसलों का प्रतिशत 89.87 एवं 10.10 पाया गया। किसी भी स्थान की कृषि उत्पादकता वहाँ प्रयोग किये जाने वाले सिंचाई के साधन, उन्नत बीज, उन्नत यंत्र, रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग आदि पर निर्भर करती है। जिले के आदिवासी समाज आज भी इन चीजों के उपयोग से अपने आप को दूर रखे हुऐ है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
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Pages:363-365
How to cite this article:
डाॅ0 मृगेन्द्र सिंह परिहार "सीधी जिले में जनजातियों के विकास कार्यक्रमों का कृषि पर प्रभाव का अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 363-365
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