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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
संगीतकला की उत्पति एवं विकास
Authors
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे
Abstract
भारतीय संगीतकला का उद्गम सृष्टि के अरूणोदय काल में उस पुण्य बेला में हुुआ जब ब्रह्ना ने मानव का सृजन किया था। उसी समय लोक कल्याण की भावना से पे्ररित होकर उन्होंने संगीतकला की भी सर्जना कर दी। प्रकृति की गोद में अवतरित संगीतकला में शनैः शनैः विकसित पल्लवित एवं पुष्पित हो अपने सौरभ से विश्व के प्रांगण में प्रसारित कर दिग्दिगन्तों को सुरभित किया है। जीवन के अरूणोदयकाल से लेकर अब तक संगीतकला की अविच्छित्र धारा अबाध गति से अनवरत प्रवाहित होती चली आ रही है और उसकी गति में निरन्तर विकास होता रहा है। प्राग्वैदिक कालीन मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा नामक स्थानों जो उत्खनन हुआ है उसमें प्राप्त अवशेषों से तत्कालीन संगीतकला की रूपरेखा का ज्ञान होता है। हड़प्पा में एक नृत्यरत पुुरूष की खंडित मूर्ति प्राप्त हुई है जिसमें नर्त्तक का दायाँ पैर भूमि पर टिका हुआ है और बायाँ पैर नृत्यक्रिया में ऊपर उठाया गया है। नृत्यकलाविशारद विद्वान् इसे नटराज शिव का स्वरूप मानते हैं। इसी प्रकार मोहनजोदड़ो में एक कास्य मूर्ति उपलब्ध हुई है जिसमें सुकोमल नारी का ललित अभिनय अंकित है। नर्त्तकी का शरीर प्रायः अनावृत अवस्था में है। केश जूड़े में बँधे हुए हैं और दोनों हाथों में पर्याप्त चूड़ियाँ अंकित हैं। दायाँ पैर एक स्थान पर टिका है और बायाँ पैर नृत्य की मुद्रा में आगे बढ़ा हुआ है। दायाँ हाथ कमर पर टिका हुआ है और बायाँ हाथ नीचे की ओर लटका हुआ है। ऐसा लगता है कि नर्त्तकी अभी थिरक उठेगी। इनके अतिरिक्त हड़प्पा में प्राप्त एक चित्र व्याघ्र के सामने ढोल बजाते हुए एक पुरूष अंकित है। इसी प्रकार दो अन्य मुद्राओं पर ढोल अंकित है जिसके मुख चर्म से आबद्ध है। इसी प्रकार ढोल की आकृति का एक वाद्य एक मृत्तिका की मूर्ति के गले में लटकता हुआ प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त झांझ और करताल जैसे वाद्य भी यहाँ उपलब्ध हुए हैं। इन मूर्तियों एवं चित्रों के अनुशीलन से ज्ञात होता है कि उस समय संगीत का पर्याप्त प्रचलन था तथा धार्मिक एवं लौकिक समारोहों पर गीत, नृत्य एवं वाद्यों द्वारा लोकरंजन किया जाता था। नृत्य के साथ गीत एवं वाद्यों की संगत भी की जाती थी। इनके अतिरिक्त और भी बहुत से अवशेष प्राप्त हुए हैं जिनके द्वारा तत्कालीन संगीतकला की समृद्धि का ज्ञान होता है।
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Pages:309-310
How to cite this article:
डाॅ0 अशोक कुमार दुबे "संगीतकला की उत्पति एवं विकास". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 309-310
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