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VOL. 3, ISSUE 5 (2018)
सतना जिला : ग्रामीण अधिवास का एक भौगोलिक अध्ययन
Authors
प्रदीप सिंह
Abstract
ग्रामीण विकास का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय के भौतिक एवं सामाजिक कल्याण में संवर्धन करना है। समन्वित ग्रामीण क्षेत्रीय विकास में समांकलन एक ‘‘विधितंत्र’’ ग्रामीण क्षेत्र, उसका ‘‘केन्द्र बिन्दु’’ एवं ‘‘विकास’’ उसका उद्देश्य है। समन्वित ग्रामीण क्षेत्रीय विकास के संतुलित विकास से संबंधित है जिसमें भौतिक परिवेश में सामाजिक आर्थिक क्रियाओं के उपयुक्त अवस्थिति का निर्धारण विशेष महत्वपूर्ण है जिसके फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सामाजिक न्याय मिल सकता है।
विभिन्न पिछड़े क्षेत्र क्रमशः अस्तित्व में लाये जा सकते हैं, इनका भौगोलिक क्षेत्र एवं जनसंख्या का सन्तुलन भी बढ़ता रहेगा और उसी के साथ-साथ सेवा केन्द्र और विकास केन्द्र भी बढ़ते रहेगें। केन्द्रीय ग्राम, सेवा केन्द्र, विकास केन्द्र तथा क्षेत्रीय नगर सड़क, आवागवन के साधनों, संचार साधनों द्वारा नगरों एवं महानगरों से जोड़े जा सकगें। सम्पूर्ण विकास का नियोजन करते समय हमें सेवा केन्द्रों के स्थानों का चयन तथा आर्थिक नियोजन की सम्भावनाओं को ध्यान में रखना होगा। लघु स्तरीय नियोजन को किसी अधिवास के विशेष स्तर तक ही सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह केन्द्रीय स्थानों को ध्यान में रखकर नियोजन की नीति बनाने पर बल देता है। इसका उद्देश्य है कि निम्न स्तर से उच्च स्तर की ओर चलकर सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास किया जाय। बहुत से समस्याओं में यह क्षेत्र जिले से अलग भी हो सकता है। ऐसा करने में स्थानीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं और उनके विकास के उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है। सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों का आपसी सामंजस्य तथा सही स्थान पर उनकी स्थापना सूक्ष्म स्तरीय नियोजन के आधार बिन्दु हैं।
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Pages:74-78
How to cite this article:
प्रदीप सिंह "सतना जिला : ग्रामीण अधिवास का एक भौगोलिक अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 5, 2018, Pages 74-78
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