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VOL. 3, ISSUE 5 (2018)
सतना जिले में कोल जनजाति के शैक्षणिक विकास का समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
रमेश प्रसाद कोल
Abstract
भारत में शिक्षा का प्रसार बिलकुल अनियोजित तरीके से हुआ है तथा इसका विस्तार करते समय भविष्य की आवश्यकताओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। जनजातीय शिक्षा योजना भी इसी जल्दबाजी का शिकार हुई है। शिक्षण-प्रशिक्षण पर ध्यान केन्द्रित नहीं किया गया एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने की सुनियोजित तरीके को अपेक्षाकृत देर से अपनाया गया है। भारत में 1950 से पहले जनजातीय लोगों को शिक्षित करने के लिये कोई प्रत्यक्ष योजना नहीं थी। जनजाति के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जनजातीय समाज अनेक प्रकार की गंभीर समस्याओं से ग्रस्त है। अतः समस्याओं के समाधान हेतु जिले में क्रियाशील गैर सरकारी संगठनों का प्रमुख उद्देश्य इन्हीं समस्याओं का निराकरण करना है, जिसके कारण शिक्षा के प्रति गैर सरकारी संगठनों की अभिरूचि अपेक्षाकृत उदासीन है, क्योंकि उनका अधिकतर समय आर्थिक समस्याओं के सुलझाने में ही व्यतीत हो जाता है। अशिक्षा के कारण महिलायें व्यवसायिक शिक्षण-प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाती हैं और उनका विकास अवरूद्ध हो जाता है एवं मजबूरीवश श्रमिक कार्य में ही उन्हें संलग्न रहना पड़ता है। जनजातीय शिक्षा के विकास में भाषा भी एक बड़ी बाधा है। जनजातीय भाषायें मौखिक हैं, जिसकी कोई लिपि नहीं है, जबकि शिक्षा एवं अन्य कार्यक्रम क्षेत्रीय भाषा में तैयार किये जाते हैं जिसके कारण जनजाति में रूचि की कमी हो जाती है।
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Pages:28-32
How to cite this article:
रमेश प्रसाद कोल "सतना जिले में कोल जनजाति के शैक्षणिक विकास का समीक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 5, 2018, Pages 28-32
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