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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
श्याम सखा ‘श्याम’ की ग़जलों में सामाजिक चेतना
Authors
डाॅ0 सुदेश कुमारी
Abstract
‘श्याम सखा ‘श्याम’ हिन्दी साहित्य जगत में महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उन्होंने काव्य संग्रह-औरत वेद पाँचमां (हरियाणावी दोहे) एक टुकड़ा दर्द, औरत को समझने के लिए, क्या फर्क पड़ता है (हिन्दी), दुनिया -भर के ग़म थे (गजल-संग्रह) कहानी संग्रह-अकथ, घणी गई थोड़ी रही (हिन्दी), इक सी बेला (पंजाबी) कोई फायदा नहीं (हिन्दी), समझणिए की मर (हरियाणवी), कहाँ-कहाँ तक (हिन्दी), लघुकथा-नाविक के तीर (हिन्दी) आदि विधाओं की रचना की। श्याम की गजलों में समाज की स्वार्थी भावना, रिश्वत खोरी भौतिकवाद का महत्व, आधुनिक समाज में तनाव, पश्चाताप का चित्रण, प्रभु इच्छा का चित्रण, बदलते रिश्तों का चित्रण, जाति-पाति का विरोध, बीती बात भूल जाने की प्रेरणा और माता-पिता के घटते सम्मान का चित्रण किया गया है।
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Pages:1343-1345
How to cite this article:
डाॅ0 सुदेश कुमारी "श्याम सखा ‘श्याम’ की ग़जलों में सामाजिक चेतना". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 1343-1345
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