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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्थाः महात्मा गाँधी के विचारों की प्रासंगिकता
Authors
चन्द्रजीत सिंह यादव
Abstract
मोहन दास करमचन्द गाँधी एक उच्च विचारों वाले व्यक्ति थे। इनके व्यक्तित्व की छवि सम्पूर्ण भारत पर गहराई से पड़ी। यह कर्मों पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। अपने इसी विश्वास के बल पर इन्होंने वर्षो से गुलामी कि जंजीरों में जकड़े हुये भारत देश को आजादी दिलायी। वर्तमान में भारत देश कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक व्यवस्था में तेजी से परिवर्तन आया है, इस परिवर्तन का कारण है भारत देश कि संस्कृति और आर्थिक व्यवस्था में वैश्विकरण का दखल जिन समस्याओं का सामना आज भारत देश कर रहा है, उन समस्याओं कि उपकल्पना गाँधी जी ने अपने जीवन्त काल में ही कर दी थी। महात्मा गाँधी जी का कथन है कि - ‘‘मैं यह नही चाहता कि मेरे घर को ऊँची चादर दीवारी से घेर दिया जाये ओर खिड़कियों को मजबूती से बंद कर दिया जाये, मै चाहता हूँ कि सभी संस्कृतियों का प्रवाह मूक्त रूप से मेरे घर मैं हो परन्तु मैं उस प्रवाह में उखड़ने से इनकार करता हूँ।‘‘
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Pages:939-941
How to cite this article:
चन्द्रजीत सिंह यादव "वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्थाः महात्मा गाँधी के विचारों की प्रासंगिकता". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 939-941
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