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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
भारत में महिला सशक्तीकरण: सामाजिक समस्याएॅं एवं समाधान
Authors
डाॅ0 पपली राम, डाॅ0 नरेन्द्र सीमतवाल, अजय कुमार शर्मा
Abstract
आज महिलाएं लगभग सभी क्षेत्रों में पुरूषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। आज भी हमारे समाज में बहुत से ऐसे सामाजिक अवरोध है जैसे- सामाजिक रूढियां, बाल-विवाह, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, घरेलु हिंसा, यौन-उत्पीडन, लैगिंक भेदभाव, गरीबी और अज्ञानता जिसके कारण महिलाओं को सशक्त होने में बाधा उत्पन्न हो रही है। सामाजिक रूढियाॅं, महिलाओं के सशक्तीकरण में सबसे बडी बाधक है। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 16 से 49 साल की 63 फीसदी महिलाओं को अपने घर में फैसले लेने का अधिकार नहीं है। महिलाएं केवल घर के बाहर ही नही बल्कि घर में भी सुरक्षित नही है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरों की रिपोर्ट का अवलोकन करे तो पिछले वर्ष के रिकार्ड के अनुसार महिलाओं के लिए उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश सबसे अधिक असुरक्षित राज्यों के रूप में उभर रहे हैै। राजस्थान भी महिलाओं के अपराध के मामले में पीछे नहीं है। आज महिला भ्रूण हत्या की बुराई नगरीय और ग्रामीण समाज के प्रत्येक वर्ग में दिखई पडती है। वही महिलाओं की दृष्टि से केन्द्रशासित राज्य बेहतर हैं। जब भी महिलाओं को मौका मिला है उन्होनें बेहत्तर कार्य किये है। महिलाओं ने जहां एक ओर स्वाधीनता आन्दोलन में पुरूषों के साथ बराबर कदम मिलाकर सहयोग दिया वहीं आज राजनीति में भी अहम भूमिका का निर्वहन कर रही हैं।
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Pages:1007-1010
How to cite this article:
डाॅ0 पपली राम, डाॅ0 नरेन्द्र सीमतवाल, अजय कुमार शर्मा "भारत में महिला सशक्तीकरण: सामाजिक समस्याएॅं एवं समाधान". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 1007-1010
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