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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
अरविन्द घोष के धार्मिक कार्यो का समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
डाॅ0 कृष्ण बहादुर सिंह
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र अरविंद घोष के धार्मिक कार्यों का समीक्षात्मक अध्ययन पर आधारित है। श्री अरविन्द का शिक्षण विधि के सम्बन्ध में विचार पूर्णतः स्पष्ट नहीं फिर भी उन्होंने अनेक विधियों का प्रतिपादन किया है जैसे रूचि के आधार पर शिक्षा भाषा में मातृभाषा के ज्ञान पर जोर दिया है। श्री अरविन्द का मानना है कि बालक के साथ प्रेम तथा सहानुभूति का वातावरण उत्पन्न करना चाहिए। श्री अरविन्द के अनुसार मस्तिष्क का चैथा भाग ज्ञान अथवा चेतना की शक्ति है व्यक्ति इसी शक्ति के आधार पर अपने विकास की वर्तमान अवस्था में पहुँच सका है। शिक्षकों का कतव्र्य है कि वे बालकों की इस शक्ति का विकास इस प्रकार करे कि उसमें लालच भेद-भाव गलतियाँ आदि दुर्गुणों से प्रभावित कल्पना न मिली हो। इस शक्ति का विकास सम्पूर्ण मानव जाति के लिए लाभदायक और अत्यन्त आवश्यक है इसका विकास शिक्षकों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाना चाहिए इसके लिए बालक को अधिक से अधिक स्वतंत्रता और अवसर प्रदान किये जाने चाहिए फिर बालक स्वयं ही ज्ञान खोज कर सकेगा।
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Pages:685-688
How to cite this article:
डाॅ0 कृष्ण बहादुर सिंह "अरविन्द घोष के धार्मिक कार्यो का समीक्षात्मक अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 685-688
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