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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
नयी कविता में मानव मूल्यों में परिवर्तनशीलता
Authors
उपासना
Abstract
प्रस्तुत शोधपत्र में नयी कविता में मानव मूल्यों में होते विघटन को दर्शाया गया है। दिन-प्रतिदिन मानव मूल्यों के कारण समाज में बढ़ने वाली समस्या को बताया गया है। मनुष्य नैतिक, सामाजिकता, धार्मिक एवं राजनीतिक मूल्यों को शाश्वत मानकर मानव-समाज उनके सहारे जीवन में शान्ति और सुख प्राप्त करने के लिए युगों युगों से प्रयत्नशील रहा है, लेकिन उनको प्रथम और द्वितीय महायुद्धों ने झूठा, खोखला, अस्थायी और अविश्वसनीय बना दिया हे। नयी कविता अपने आप में अपने समय, समाज और उसके कुरूप का यथार्थ का चित्रण करती है। नयी कविता का अपना समाजशास्त्र है। उनका अपना अस्तित्व ही उसको अन्य कविताओं से अलग करता है। नयी कविता में समकालीन जीवन की भी परछाई देखने को मिलती है। नयी कविता के कवियों ने अपने युग समाज, परिवेश और सरकारों से जोड़ते हुए अपने काव्य को अभिव्यक्ति दी है। कवि को मानव मूल्यों को प्रस्तुत करने के लिए न केवल अपनी काव्याभिव्यक्ति का त्याग करना पडता है, अपितु सडे गले प्राचीन सरोकारों का भी त्याग करना पडता है।
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Pages:25-27
How to cite this article:
उपासना "नयी कविता में मानव मूल्यों में परिवर्तनशीलता". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 25-27
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