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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
जनवादी कवि कबीर
Authors
किरण मयी
Abstract
कबीर हिंदी के पहले प्रमुख कवि है जिनमें गहरी प्रश्नाकुलता दिखाई पड़ती है। यथास्थिति से विद्रोह करने वाला उनके जैसा बड़ा व्यक्तित्व मध्य युग में नहीं हुआ। कबीर में समता और स्वतंत्रता के आधुनिक मूल्यों का जैसा परिपाक मिलता है, वैसा किसी और लेखक में नहीं। कबीर जनवादी कवि थे तथा उन्होनें अपनी वाणी से जन - जन की समस्याओं का वर्णन किया है।
कबीर भारतीय समाज के जिस युग में पैदा हुए थे, वह मुस्लिम काल के नाम से जाना जाता है। कबीर के समय तक उŸार की आबादी का एक अच्छा खासा भाग मुसलमान हो चुका था। स्वयं कबीर जिस जुलाहा जाति में पैदा हुए थे, वह एक दो पीढ़ी पहले मुसलमान हो चुकी थे। लेकिन कबीर अपने को हिंदु या मुसलमान नहीं मानते है। हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार भी कबीर का जीवन दर्शन उनके जन्म और जातिगत वातावरण से बड़ी हद तक प्रभावित हुआ था। उनकी सामाजिक चेतना बहुत तीव्र थी। जनता के दुख दर्द और उसकी वेदना से फुटकर ही उनके काव्य की सरस्वती बही थी। जनता की पीड़ा से उनका काव्य ओत प्रोत है।
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Pages:878-879
How to cite this article:
किरण मयी "जनवादी कवि कबीर". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 878-879
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