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International Journal of
Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
असमर्थों एवं दिव्यांगों के सशक्तीकरण में समावेशी शिक्षा की भूमिका
Authors
अजीत कुमार यादव
Abstract
सभ्य समाज की अवधारणा, विकास तथा निरन्तरता बिना ज्ञान के सम्भव नही है। ज्ञान आधारित राज तथा समाज की स्थापना एवं वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए शिक्षा सबसे महतवपूर्ण साधन है। ऐसी स्थिति में किसी भी क्षेत्र में सफलता पूर्वक कार्य करने के लिए अथवा समाज स्वीकृत व्यवहार करने के लिए विशेष स्तर की परिपक्वता की आवश्यकता होती है। यदि किसी कारणवश व्यक्ति से सही सन्तुलन विकसित नही हो पाता है या वांछित परिपक्वता प्राप्त नही हो पाती है तो वह उस क्षेत्र में आगे नही बढ़ सकता और ना ही वांछित व्यवहार ही कर पायेगा ऐसे ही बालकों को असमर्थ एवं विकलांगों की श्रेणी में रखा जाता है। ‘‘विकलांगता एवं असमर्थता शारीरिक रूप से लोगों से उतना नही छीनती जितना, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से वह उनहें प्रभावित करती है। इन्हीं परिस्थितियों को दूर करने के लिये शिक्षा के आधुनिक स्वरूप में ऐसे परिवर्तन की आवश्यकता है जिससे असमर्थों एवं दिव्यांगों आदि का सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक समावेशन किया जा सके और उनकी विभिन्नताओं एवं उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखना उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सके।
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Pages:159-161
How to cite this article:
अजीत कुमार यादव "असमर्थों एवं दिव्यांगों के सशक्तीकरण में समावेशी शिक्षा की भूमिका". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 159-161
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