Logo
International Journal of
Advanced Research and Development

Search

ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
राजभाषा के रूप में हिन्दी भाषा का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
रेणु
Abstract
राजभाषा से अभिप्राय है - राजकाज की भाषा अर्थात् शासन की भाषा। अधिकांशतः वही भाषा राजभाषा बनाई जाती है जिसमें सरलता, सुबोधता, लिपि की स्पष्टता तथा वैज्ञानिकता आदि विशेषताएँ हों, इसके साथ-साथ वह देश की अधिकांश जनता द्वारा बोली और समझी जाती हो परन्तु कभी-कभी शासन या सत्ता पर जिस व्यक्ति या जाति का अधिकार होता है उसके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को भी राजकाज की भाषा बना दिया जाता है। भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि यहाँ मुगलों के कार्यकाल में अरबी-फारसी और उर्दू राजभाषा के रूप में देश में अभिहित थी। तदुपरान्त अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग राजकाज के लिए होने लगा। इसलिए देश के स्वतन्त्र होने के बाद 26 जनवरी, 1950 को गणतन्त्र की घोषणा के साथ ही हिन्दी भाषा का संवैधानिक रूप से देश की राजभाषा के रूप में अभिहित कर देश की प्रथम भाषा बनाना अनिवार्य हो गया था।
Download
Pages:113-116
How to cite this article:
रेणु "राजभाषा के रूप में हिन्दी भाषा का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 113-116
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.