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International Journal of
Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
‘निर्मला’ में चित्रित नारी-समस्याएँ
Authors
डाॅ0 पूनम काजल
Abstract
प्रेमचन्द सामाजिक जीवन को एक नई गति और दिशा प्रदान करने वाले युगचेता साहित्यकार थे। वे साहित्य को मानव की संवेदना और आन्तरिक व्यक्तित्व को बदलने का एक समर्थ औज़ार मानते थे। उन्होंने अपनी अनेक रचनाओं में नारी-जीवन से जुड़ी अनेकानेक विषमताओं को उद्घाटित किया है। तत्कालीन युग में व्याप्त दहेज प्रथा व अनमेल विवाह की त्रासदी से आहत प्रेमचन्द ने अपने ‘निर्मला’ उपन्यास में अत्यन्त व्यापकता के साथ इन समस्याओं को उठाया है। उन्होंने इस उपन्यास में भारत की निरीह, अबला नारी को केन्द्र में रखकर उसकी अमानवीय जीवन-स्थितियों को उद्घाटित करने का भरसक प्रयत्न किया है। नारी-जीवन से सम्बन्धित समस्याओं तथा उनके दुष्परिणामों के चित्रण के मूल में प्रेमचन्द्र जी का मुख्य उद्देश्य यही रहा है कि विद्रोह का नारा बुलन्द करने से पहले वे उसकी स्वीकृति के लिए उपयुक्त समाज का गठन चाहते थे।
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Pages:875-876
How to cite this article:
डाॅ0 पूनम काजल "‘निर्मला’ में चित्रित नारी-समस्याएँ". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 875-876
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