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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
तुजुक-ए-बाबरी एवम् तुजुक-ए-जहांगीरी का तुलनात्मक अध्ययन : प्रशासनिक व्यवस्था के विशेष सन्दर्भ में
Authors
नरेश कुमार
Abstract
मुगलकालीन इतिहास के स्त्रोत के रूप में मुगलशासकों की आत्मकथाओं का अपना एक विशिष्ट महत्वपूर्ण स्थान है। कोई भी दरबारी इतिहासकार बादशाह के कितना ही करीब क्यों न हो वह उसकी कार्यप्रणाली और योजनाओं का मूल्यांकन उतने अच्छे ढंग से नहीं कर सकता जितना बादशाह स्वयं कर सकता है। इसलिए बाबर की आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी और जहांगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहाँगीरी मुगलकालीन इतिहास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं।
हिन्दुस्तान विजय के बाद मुगलों के सामने सबसे महत्वपूर्ण समस्या एक सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के सन्दर्भ में थी। मुगल बादशाह यह भली भांति जानते थे कि सुदृढ़ शासन व्यवस्था के बिना वे हिन्दुस्तान में अपनी शक्ति स्थापित नहीं कर सकते। हमें दोनों बादशाहों के समय के प्रशासन पर भी परिस्थितियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। क्यांेकि बाबर के लिए हिन्दुस्तान एक नया देश था, जहां की भाषा, लोग सब कुछ उसके लिए नया था, साथ में बाबर को अपने अस्थाई साम्राज्य के खो जाने का खतरा था। जबकि जहांगीर के लिए हिन्दुस्तान कोई नया देश नहीं था और उसे यह प्रशासन अपने पिता से सुदृढ़ अवस्था में विरासत में प्राप्त हुआ था। अतः इन सब परिस्थितियों का प्रभाव उनके प्रशासन पर देखने को मिलता है। प्रस्तुत शोध पत्र में मुगलशासकों की आत्मकथाओं को आधार बनाकर मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था को समझने का प्रयास किया गया है।
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Pages:612-614
How to cite this article:
नरेश कुमार "तुजुक-ए-बाबरी एवम् तुजुक-ए-जहांगीरी का तुलनात्मक अध्ययन : प्रशासनिक व्यवस्था के विशेष सन्दर्भ में". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 612-614
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