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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
तुजुक-ए-बाबरी एवम् तुजुक-ए-जहांगीरी का तुलनात्मक अध्ययन : मुद्रा एवम् माप-तोल प्रणाली के विशेष सन्दर्भ में
Authors
नरेश कुमार
Abstract
मुगलकालीन इतिहास के स्त्रोत के रूप में मुगलशासकों की आत्मकथाओं का अपना एक विशिष्ट महत्वपूर्ण स्थान है। कोई भी दरबारी इतिहासकार बादशाह के कितना ही करीब क्यों न हो वह उसकी कार्यप्रणाली और योजनाओं का मूल्यांकन उतने अच्छे ढंग से नहीं कर सकता जितना बादशाह स्वयं कर सकता है। इसलिए बाबर की आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी और जहांगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहाँगीरी मुगलकालीन इतिहास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। सुदृढ़ अर्थव्यवस्था किसी भी राज्य की सम्पन्नता का आधार स्तम्भ मानी जाती है और एक बादशाह के लिए उसके राज्य का आर्थिक रूप से सुदृढ़ होना एक अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय है। बाबर और जहांगीर एक सुदृढ़ आर्थिक तंत्र के महत्त्व से परिचित थे और इस बात को भली-भाँति जानते थे कि राज्य को एक सुदृढ़ आर्थिक आधार प्रदान किए बिना राज्य को एक स्थायी आधार नहीं दिया जा सकता और उनकी इसी सोच का परिणाम उनकी आत्मकथाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यही कारण है कि उनकी आत्मकथाओं में मुद्राव्यवस्था, कर प्रणाली, कृषि उत्पादन और व्यापार सम्बंधी विवरण की बहुलता दिखाई देती है। प्रस्तुत शोध पत्र में मुगलशासकों की आत्मकथाओं को आधार बनाकर मुगलकालीन मुद्रा एवं माप तौल प्रणाली को समझने का प्रयास किया गया है।
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Pages:607-609
How to cite this article:
नरेश कुमार "तुजुक-ए-बाबरी एवम् तुजुक-ए-जहांगीरी का तुलनात्मक अध्ययन : मुद्रा एवम् माप-तोल प्रणाली के विशेष सन्दर्भ में". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 607-609
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