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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
पवई पठार में जल जनित भूक्षरण की समस्याएँ एवं प्रबन्धन: एक भौगोलिक अध्ययन
Authors
डाॅ. अनिरुद्ध वर्मा
Abstract
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के भौतिक घटको में जल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है किन्तु कभी-कभी इसका प्रभाव आपदाओं का कारण बनता है। वर्षा जल की बूँदे जब धरातल से टकराती है तो उसे क्षरित करती है। क्षरण कार्य द्वारा धरातल वंजर-नग्न भूमि में परिवर्तित होकर विकास मार्ग को अवरुद्ध कर देता है। अध्ययन क्षेत्र पवई पठार में जलजनित भूक्षरण की दर में तीव्र वृद्धि पाई जाती है। भूक्षरण की तीव्रता का प्रभाव कृषि सहित पशुपालन, वन विकास, जैव विविधता जैसे तत्वों को प्रभावित करते हुये विकास की गति को प्रभावित किया है। यद्यपि 1990 के पश्चात् भूक्षरण नियंत्रण के लिये प्रयास किये जा रहे है, तथापि वान्छित सफलता प्राप्त नही हो पाई है। अभी भूक्षरण प्रबन्धन के क्षेत्र में कार्य को गति प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रसस्त हो सके।
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Pages:493-496
How to cite this article:
डाॅ. अनिरुद्ध वर्मा "पवई पठार में जल जनित भूक्षरण की समस्याएँ एवं प्रबन्धन: एक भौगोलिक अध्ययन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 493-496
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