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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
गठबन्धन की राजनीति का उत्तर-प्रदेश की शासन व्यवस्था पर प्रभाव
Authors
आशुतोष शर्मा
Abstract
राजनीति विज्ञान में गठबन्धन पद को परिभाषित करते हुए रोजर स्क्रटन ने लिखा है कि- ‘विभिन्न दलों या राजनीति पहचान रखने वाले प्रमुख व्यक्तियों का आपसी समझौता गठबन्धन कहलाता है। गठबन्धन सरकार की स्थापना दो या दो से अधिक राजनीतिक लोक निर्वाचित उम्मीदवारों के समूह अन्य किसी दल के निर्वाचित उम्मीदवारों के समर्थन से होती है।‘ ऐसा सदन में बहुमत जुटाने के लिया किया जाता है। गठबन्धन की आवश्यकता तब महसूस होती है जब व्यवस्थापिका में किसी एक दल राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता। गठबन्धन निर्वाचन से पहले या बाद में ऐसे दलों के मध्य होता है जो कार्यक्रम एवं नीतियों में समानता रखते हैं। गठबन्धन सरकारों के कारण ही विभिन्न धर्म, जाति एवं सम्प्रदाय के राजनीतिज्ञ एक मंच पर कार्य करतें है जिससे देश में एक धर्म निरपेक्ष ताकत का जन्म होता है। गठबन्धन सरकार की उत्पत्ति विश्व-स्तर पर व्यापक रुप से हुई है। उसकी प्रकृति और कारक तत्व व उसकी स्थिरता प्रत्येक देश की राजनीतिक घटना चक्रों पर टिकी हुई है। इसकी उत्पत्ति के निर्माणकारी तत्वों का अध्ययन करने यह विदित होता है कि प्रत्येक देश में यह छोटे और बड़े स्तर पर लगभग एक जैसे है। जब किसी देश की जनता को ऐसा प्रतीत होता है कि बहुमत आपत्ति शासन प्रणाली उनके हितों की अवेहलना कर रही है या एक ही राजनीतिक दल अपनी निरंकुशता को बढ़ावा देता आ रहा है तथा अपने दायित्वों की तरफ से वे परवाह है तब वह विकल्पों को खोजती है। ऐसे में जनता का किसी एक राजनीतिक दल पर विश्वास नहीं रह पाता। मतदाता जब विकल्प की खोज करता है तब गठबन्धन की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। उत्तर-प्रदेश की राजनीति से केंन्द्र की राजनीति भी प्रभावित होती है।
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Pages:652-654
How to cite this article:
आशुतोष शर्मा "गठबन्धन की राजनीति का उत्तर-प्रदेश की शासन व्यवस्था पर प्रभाव". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 652-654
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