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Advanced Research and Development

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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
मुगल चित्रकला एवं प्रान्तीय शैलियाँ
Authors
डाॅ0 केशरी नंदन मिश्र
Abstract
मुगल वंश के संस्थापक बाबर की रूचि चित्रकला में थी क्योंकि उसने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में 16वीं शताब्दी में फारस के चित्रकार जिहजाद का उल्लेख किया है जो पूर्ण के राफेल के नाम से प्रसिद्ध था परन्तु बाबर मुगल चित्रकला को प्रारम्भ नहीं कर सका। मुगल चित्रकला को प्रारम्भ करने का श्रेय हुमायूँ को जाता है अपनी अस्थायी राजधानी काबुल में उसने फारस के 2 चित्रकारों मीर सैय्यद अली व अब्दुस समद को आमन्त्रित किया था। भारत आते समय उन्हें भी अपने साथ ले आया तथा अरबी भाषा में लिखित एक पुस्तक दस्ताने अमीर हम्जा। हम्जानामा को चित्रित करने का कार्य सौंपा। मीर सैय्यद अली व अब्दुस समद ने चावल के एक दाने पर पोलों के खेल का चित्रण किया है जिसमें खिलाड़ी दर्शक आदि सभी मौजूद हैं। मुगल चित्रकला की वास्तविक शुरूआत अकबर के काल में हुई उसकी व्यक्तिगत रूचि चित्रकला में थी।
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Pages:649-651
How to cite this article:
डाॅ0 केशरी नंदन मिश्र "मुगल चित्रकला एवं प्रान्तीय शैलियाँ". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 649-651
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