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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
वेदान्त दर्शन : एक सिहांवलोकन
Authors
डाॅ. दिग्विजय सिहं
Abstract
शोधकर्ता ने प्रस्तुत शोध-पत्र में वेद के अन्त (अन्तिम सिद्धान्त या लक्ष्य) वेदान्त को लिया है तथा उसके बारे में विस्तृत चर्चा की है। ब्रह्मा का विवेचन जिस शास्त्र में किया जाता है उसे वेदान्त कहते हैं।
मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य ब्रह्म को प्राप्त करना ही है। वेदान्त दर्शन के प्रथम अध्याय में ब्रह्मा की जिज्ञासा, ब्रह्मा जगत की उत्त्पत्ति स्थिति व पालनकर्ता, ब्रह्मा के लक्षणादि का वर्जन किया गया है। द्वितीय अध्याय में ब्रह्मा के स्वरूपादि के विषय विविध शंकाएं तथा उनका समाधान तथा जीवात्मा की गति, इन्द्रियों की रचनादि का वर्णन तृतीय अध्याय में कर्मों के अनुसार जीवात्मा को फल परमात्मा के द्वारा देना तथा परमात्मा की उपासना का वर्णन है। चतुर्थ अध्याय में जीवात्मा के आवागमन (जन्म और मृत्यु को प्राप्त करने) मोक्ष तथा ब्रह्मज्ञान के विविध उपायों का वर्णन है।
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Pages:905-911
How to cite this article:
डाॅ. दिग्विजय सिहं "वेदान्त दर्शन : एक सिहांवलोकन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 905-911
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