ARCHIVES
VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
भारत में बाढ़ की भौगोलिक विवेचना
Authors
अंकित सिंह
Abstract
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जो विभिन्न तत्वों में, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, पदार्थ हो या अपदार्थ, अनवरत चलती रहती है तथा हमारे प्राकृतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण को प्रभावित करती है। भारत की गणना उन राष्ट्रों में होती है जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। असाधारण उपमहाद्वीपीय आयाम, भौगोलिक स्थिति और मानसून का स्वरूप, भारत को विश्व को सबसे अधिक खतरा-प्रवण देशों की पंक्ति में ला खड़ा करते हैं। यह हिमालय क्षेत्र में होने वाले भूस्खलनी हिमघावी के अलावा, सूखे बाढ,़ चक्रवात और भूकम्पीय घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। बाढ़ के कारण प्रतिवर्ष जहां लाखों एकड़ फसल का नुकसान हो रहा है तो वही दूसरी तरफ जान-माल का भी भारी नुकसान होता है, इसलिये बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
Download
Pages:855-856
How to cite this article:
अंकित सिंह "भारत में बाढ़ की भौगोलिक विवेचना". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 855-856
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
