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International Journal of
Advanced Research and Development

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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
कबीर विमर्श
Authors
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी
Abstract
संस्कृत एवं हिन्दी साहित्य के अनेक महाकवियों के समान कबीर के प्रारंभिक जीवन एवं जन्म के संदर्भ में विद्वानों के समक्ष एकमत नहीं हैं इसका सबसे बड़ा कारण तो इन विभूतियों का अपने संदर्भ में न लिखना ही है पर कबीर के साथ एक और बड़ी घटना उन्हें कबीर पंथ के अनुयायियों द्वारा ईश्वर के रूप में स्थापित करने की होड़ भी जुड़ी हुई है। कबीर को ईश्वर मान लेने पर उनके जन्म आदि की ढेर सारी पारलौकिक घटनाएँ जुड़ गईं इनके जुड़ने के बाद उनके जन्म का निर्णय और अधिक दुरूह और कठिन हो गया। कबीर ने अपने जन्म के सयम के संदर्भ में कुछ नहीं लिखा है, इनके द्वारा कहे गये अमृत वचनों में इनके परिवार एवं इनसे जुड़ी हुई अन्य अनेक बातों का पता चलता है पर जन्म का स्पष्ट पता नहीं चल पाता है।
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Pages:402-403
How to cite this article:
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी "कबीर विमर्श". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 402-403
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