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International Journal of
Advanced Research and Development

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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
भारत में जनजातीय विकास: एक सैद्धान्तिक विवेचन
Authors
डाॅ0 सुनीता बघेल
Abstract
भारत विविधताओं का देश है। यह सच्चे अर्थो में समुदायों का एक समुदाय है। इन समुदायों में से एक है-जनजातीय समुदाय जिनकी अपनी जीवन शैली है। इनके विशिष्ट रीति-रिवाज एवं संस्कृति की अपनी पहचान है। ये लोग सदियों से अलगाव की स्थितियों में राष्ट्र की मुख्यधारा से पृथक रहे हैं। इन अलगाव की स्थितियों ने उन्हें असमानता, शोषण एवं निम्न स्थिति का जीवन जीने पर विवष किया है। स्वतन्त्रता के पश्चात् जनजातीय समुदायों को राजनीतिक सहभागिता का अवसर प्रदान करने के लिए तीन प्रकार की व्यवस्थाओं को मुख्य रूप से अपनाया गया है। प्रथम, जनजातीय समुदाय की सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए शैक्षणिक कल्याणकारी योजनायें, द्वितीय, सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था, इस नीति के अधीन जनजातीय समुदाय के सदस्यों के लिए सभी प्रकार की नौकरियों में स्थान आरक्षित किए गए हैं तथा पदोन्नति की विशेष सुविधा भी प्रदान की गयी है, तृतीय राजनीतिक आरक्षण की व्यवस्था।
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Pages:385-388
How to cite this article:
डाॅ0 सुनीता बघेल "भारत में जनजातीय विकास: एक सैद्धान्तिक विवेचन". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 385-388
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